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Todays Date
19 February 2020

आमजनमानस का शोषण बन्द करे सरकार : सौरभ आहूजा

फोटोः डीडी 6
कैप्शन : पत्रकारों से वार्ता करते राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ आहूजा।
आमजनमानस का शोषण बन्द करे सरकार : सौरभ आहूजा
संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ आहूजा ने राजधानी दून मे मीडिया कर्मियों से वार्ता करते हुये कहा की 15 अगस्त 1947 से पूर्व अंग्रेज शासन काल में अंग्रेजी सत्ता जब भी शासन हेतु कोष को भरने की आवश्यकता होती थी, सत्ता लगान लगाती थी या फिर पूर्व लगान की राशि को बढ़ाती थी। किसानों के जो भी हालात हों, किसी भी स्थिति में अपने कर्मचारियो के माध्यम से कोष को भरने हेतु किसी भी दशा में उगाही होती थी। श्री आहूजा ने कहा की देश आजाद होने के बाद आज पुनः ये हालात क्यों? मानते हैं की सरकार के पास अर्थव्यवस्था के इस असंतुलित हालात में सरकारी खजाना खाली है, तो क्या इसका आशय यह है की वो जनता जो आज गिरती और सिकुड़ती अर्थव्यस्था में पैसे से मोहताज है, उससे इस तरह टैक्स तथा जुर्माने को माध्यम बनाकर सरकार द्वारा आमआदमी को शोषित किया जाएगा। आज सड़कों के बत्तर हालात हम सभी के समक्ष हैं। सड़कों पर साइन बोर्ड नहीं है, नियमों को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं हैं। इन हालात में उन्हें दुरुस्त करने के बजाय, इस तरह के जुर्माने कहाँ तक उचित है। मानते हैं की नियमों को लागू करने हेतु कड़े निर्णय लेना आवश्यक, किन्तु जब देश का अर्थव्यस्था पटरी से उतर चुकी, ऑटो सेक्टर आज तक के सबसे निचले स्तर पर है, उत्तराखंड हो या अन्य राज्य आर्थिक मंडी की चपेट मैं हैं। जिसके चलते लाखों अस्थाई कर्मचारियो को नौकरी से निकला जा रहा है। इन आपात हालात में क्या केंद्र तथा राज्य सरकार को आमजनता की संवेदनों से कोई सरोकार नहीं। आज राज्य हो देश ट्रांसपोर्टर सहित देश का आम नागरिक सरकारी खजाने को भरने हेतु इस उगाही का विरोध कर रहा हैं, किन्तु केंद्र तथा राज्य सरकार इस पर संवाद हीन हैं। इससे पूर्व भी सरकार द्वारा नोटबंदी तथा जीएसटी जैसे लिए निर्णय को चलते अब तक देश तथा राज्य में कई व्यापारी संस्थान बंद हो गए या बंद होने की कगार पर हैं। सौरभ आहूजा ने कहा की राज्य तथा देश के आमजनमानस के परिपेक्ष इस तरह के जनविरोधी नियम पर रोक लाने हेतु आवश्यक कदम उठाएं जायें। नियम जनता के हितों हेतु हैं, किन्तु वो आमजनमानस जो आज रोज़ीरोटी, शिक्षा, स्वास्थ जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए भी खर्च करने में समर्थवान नहीं उस जनता पर इस तरह का आर्थिक शोषण कहाँ तक उचित है।

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