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Todays Date
28 May 2020

धर्मिक आस्थाओं से सरकार का कोई सरोकार नहीं : सुशील कुमार

फोटो : डीडी 5

कैप्शन : पत्रकारों से वार्ता करते उत्तराखंड नवनिर्माण सेना के प्रदेश महासचिव सुशील कुमार।

धर्मिक आस्थाओं से सरकार का कोई सरोकार नहीं : सुशील कुमार

संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

देहरादून, 2 दिसंबर। उत्तराखंड नवनिर्माण सेना के प्रदेश महासचिव सुशील कुमार ने उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुये कहा की व्यक्तिगत स्वार्थो की सिद्धि हेतु पहले सुरा (शराब) तथा अब सुर (देवता) के उपयोग की भावना ने प्रदेश सरकार का दोहरे चरित्र को उजागर किया। हरिद्वार, देवप्रयाग, ऋषिकेश जैसे तीर्थ नगारिओं सहित संपूर्ण देवभूमि को शराब में सरोबार करनी सरकार के मुख से धर्म के विकास की बातें शोभा नहीं देती। धर्म तथा धर्म से जुड़ा संपूर्ण समाज स्वयं की रक्षा तथा विकास में सशक्त है। आदिकाल से संचालित वैदिक व्यवस्थाओं  में सरकार द्वारा हस्तक्षेप आस्था तथा धार्मिक भावनाओं को आहत करेगा। जिसे किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार चारधाम यात्रा के सञ्चालन में अब तक विफल रही है। तीर्थ स्थल आज भी मूलभूत सुविधाओं तथा सेवाओं  से वंचित हैं। आपदा के उपरांत से अबतक अनगिनत पुल तथा सड़कों के निर्माण कार्य लम्भित हैं, जो अबतक दुरुस्त नहीं हो सके। इस हालात में अपने अधूरे कार्यों तथा विफल योजनों को छोड़ श्राइन बोर्ड गठन पर वर्तलाप राज्य सरकार की नीति तथा सोच पर प्रश्न लगता है। आर्थिक रूप से उधार पर संचालित सरकार श्राइन बोर्ड गठन के द्वारा धर्मिक स्थलों पर अपना आधिपत्य कर धन देने वाली गाय की तरह उसका उपयोग करना चाह रही है, जो की गलत है। इस समस्त घटनाक्रम में धार्मिक मान्यताओं तथा आस्था के साथ साथ राज्य सरकार, विषम परिस्थिओं में भी कार्य करने वाले तीर्थ पुरोहित तथा पंडिताई से जुड़े संपूर्ण समाज का दमन कर हक हकूकों पर कब्ज़ा कर तीर्थों तथा मदिरों से जुड़े हजारों परिवारों को जीवन संचालन को दुर्भर करने का कार्य कर रही है। विधानसभा सत्र का आयोजन अस्थाई राजधानी देहरादून कर सरकार ने अपने ही प्रचारों तक सीमित विकास के प्रोपेगण्डे को जनता के समक्ष उजागर किया। देहरादून में सत्र का आयोजन तथा राज्य मुख्यमंत्री तथा नेताप्रतिपक्ष द्वारा मौसम को बहना बना दिए बयानों ने राज्य भावनाओं तथा जनता का अपमान किया। पक्ष हो या फिर मित्र विपक्ष या फिर तथाकथित क्षेत्रीय दल सभी एक ही हमाम में बैठ राजधानीं पर केवल बयानों तक सीमित हैं I विपक्ष के वो सभी सम्मानित नेतागण जो आज गैरसैंण में आज घेरने दे रहे हैं, उनसे प्रश्न केवल यही की अपने सरकार के कार्यकाल में गैरसेंड पर अध्यादेश क्यों नहीं लाये? उत्तराखंड नवनिर्माण सेना, राज्य की वैदिक मान्यताओं तथा आस्थाओं की रक्षा हेतु संपूर्ण पुरोहित समाज के साथ पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ इस संघर्ष मैं खड़ा है। उत्तराखंड नवनिर्माण सेना सरकार से मांग करती है की राज्य की धार्मिक भावनाओं तथा आस्थाओं का सम्मान करते हुए श्राइन बोर्ड सम्बंधित प्रस्ताव को निरस्त किया जाय तथा राज्य को 19 वर्षों के अंतराल के पश्चात भी स्थाई राजधानी देने हेतु बयान के बजाय निर्णायक कदम उठाये। प्रेस वार्ता में सुशील कुमार, दीपक गैरोला, सुरेंद्र बुटोला, सुरेश सेमवाल, हरीश थपलियाल,सतीश सकलानी, चतुर सिंह उपस्थित रहे।

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