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Todays Date
5 July 2020

गैरसैण को गैर कहने वाला उत्तराखंडी नहीं : श्रीमती गरिमा मेहरा दसोनी

फोटोः डीडी 8
कैप्शन : उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता श्रीमती गरिमा मेहरा दसोनी।
भाजपा मीडिया प्रभारी के बयान की निंदा
भाजपा मीडिया प्रभारी का बयान अत्यंत निंदनीय : श्रीमती दसोनी
गैरसैण को गैर कहने वाला उत्तराखंडी नहीं : श्रीमती गरिमा
संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता श्रीमती गरिमा मेहरा दसोनी ने दून मे मीडिया कर्मियों से वार्ता करते हुए प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी देवेंद्र भसीन के बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि यदि भसीन गैरसैंण में सुविधाओं के अभाव को सत्र न होने की वजह बता रहे है तो यह अत्यंत निंदनीय है ।
उत्तराखंड की जनता को सोचना होगा कि आखिर प्रचंड बहुमत और डबल इंजन की सरकार अगर अपने 3 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी शहीदों और राज्य आंदोलनकारियों के सपनों में बसा हुआ और आंदोलन का मुख्य बिंदु रहे गैरसैण के लिए इस तरह के बयान देते हैं तो आखिर यह पहाड़ी राज्य जा किस ओर रहा है। श्रीमती दसोनी ने कहा की भसीन की सरकार को अब पूरे 3 साल हो चुके हैं क्यों उनकी सरकार ने कांग्रेस के द्वारा किए गए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का काम नहीं किया अच्छा होता यदि पिथौरागढ़ गोचर इत्यादि की हवाई पट्टियों को सुदृढ़ किया जाता अच्छा होता यदि प्रदेश को स्थाई राजधानी दिलाने की ओर त्रिवेंद्र रावत सरकार गंभीरता दिखाती। गरिमा ने भसीन के उस बयान पर जिसमें उन्होंने के हरीश रावत के गैरसैण प्रेम को शगुफा करार दिया कड़े शब्दों में आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि किसी की राय में गैरसैण की बात करना शिगूफा है तो वह व्यक्ति कतई उत्तराखंडी मानसिकता का नहीं हो सकता। श्रीमती दसोनी ने तमाम भाजपा के लोगों को याद दिलाया कि कांग्रेस ने तो गैरसैंण में तंबू में भी कैबिनेट की बैठक की थी आज अगर गैरसैण में कभी ठंड का हवाला देकर और कभी सुविधाओं के अभाव का हवाला देकर जिस तरह से इस सरकार ने पूरे वर्ष भर एक भी सत्र गैरसैण में नहीं कराया उससे भाजपा की नियत और मंशा का पता लगाया जा सकता है उन्होंने कहा कि यह अतिशयोक्ति नहीं होगी अगर कहा जाए की गैरसैण को गैर कहने वाला उत्तराखंडी नहीं हो सकता। गैरसैण उत्तराखंड के जन-जन की भावना है और भाजपा को चाहिए था की सत्ता पर काबिज होते ही गैरसैण को राजधानी बनाने की ओर कदम बढ़ाते। लेकिन उसके उलट लगातार सरकार जिस तरह से गैरसैण दूरी बना रही हैं उससे तो यही लगता है की भाजपा राज में आने वाले भविष्य में भी उत्तराखंड को अपनी राजधानी मिलना मुश्किल है, क्योंकि उस काम के लिए जो इच्छा शक्ति और दृढ़ निश्चय चाहिए वह भाजपा नेतृत्व में नहीं दिखाई पड़ता।

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